तीसरी मुलाकात

 अब 2018 का फरवरी चल रहा था इस बीच वो शादी के सिलसिले मे उसका मुंगेर आना जाना लगा रहा पर कभी भी मेरे से कभी आमन-सामन नहीं हुआ सिर्फ पता चलता वो आई थी और जितनी भी यादें बनी थी वो अभी एकतरफा था शायद् इसलिए कोई फर्क नहीं पड़ रहा था। फरवरी मै शादी होनी थी तो लगा चले इसबार अच्छा से बात होगी पर सब पर पानी फिर गया जब पता चला बराती मे कोई भी नहीं आ रही है। आखिर शादी हो गई और अब सब अपनी दुनिया मे व्यस्त हो गए और उसकी सारी यादें समय के साथ किस तरह दिमाग से निकल गई पता ही नहीं चला। सभी अपनी अपनी मस्त थे और जब आप बिना रोजगार के होते  है तो अक्सर इन सब तरह खुबसूरत यादें की भी कोई जगह दिल मे नहीं होती है। शादी को लगभग 3 से 4 माह हो चुके थे इस बीच एक या दौ बार बात हुई वो भी बहन के मुबाईल से 3 या 4 मिनट के लिए और उस के साथ कोई संपर्क नहीं था। समय व्यतीत होता गया फिर सावन का महिना आया घर से सभी लोग देवघर जा रहे थे। पैदल रास्ता इस के घर के पीछे से है तो वहां फिर से इस के खुबसूरत चेहरा देखने को मिला कुछ देर सभी से बात करने के बाद सभी अपनी यात्रा पुरी करने के लिए आगे जाने लगे। तभी अचानक से इसके घर वाला नम्बर से मेरे नम्बर पे फौन आया उधर से अवाज आई हम को कौन लेके जायेंगे उस समय लगा ऐसा लगा माने भगवान शंकर ने मेरी सुन लि 10 मिनट इसी तरह हंसी मजाक होने के बाद सभी लोग चले गये। शायद यही से मेरे प्यार की शुरुआत हो रही थी पर अपनी दिल की बात बोलने के लिए पहले उसके मन की बात जान्ना बहुत जरुरी था क्योंकि प्यार दोनों तरफ से होता एक तरफा तो पसंद होती है( जैसे शादी के लिए लड़की देखना) पर कभी उतनी बात नहीं हुई जो मै कुछ बोल पाता और कुछ पुछ पाता फिर समय अपनी रफतार से आगे चलता जा रहा था  महिने बीत गये कोई बात और संपर्क नहीं और नाहीं अभी तक कोई फ्रर्क पड़ता इस बात को लेकर फिर मे रेलवे tech की परीक्षा देने नोयडा गया था होटल रूम अकेले सभी student  लगभग एक ही सोच मे होता है उसी सोच मे खोया था तभी फौन की घंठी बजी देखा तो चाफा से फौन था पर नम्बर बहन का था कुछ देर बहन से बात करने के बात फिर फौन पर खुशबू से बात हुई पहली बार लंबी बातें हुई दिल उस पर पुरी तरह फिदा हो गया मै अपनी दिल की बात उसको बता देना चाहता था पर मना ना कर दे इस बात के डर से चुप रहता था। क्योंकि अक्सर ऐसा लगता था लड़की खुबसूरत है हसमुख है बहुत से लोग इसके पसंद करते होगा और दुसरी तरफ मै बेरोजगार घर पर निरभर था हालांकि घर के व्यपार मे पापा और मेरा योगदान है दिक्कत किसी भी चिज की नहीं थी पर लगता था खुबसूरत लड़की वो भी कुशवाहा समाज मे कम ही मिलता है मेरे से अच्छा लड़का तो मिल ही जायेगा इसलिए मे चुप रह गया। प्यार का इजहार 

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