दुसरी मुलाकात

 26/11/2017 दुसरी बार फिर से उसको देखने का मौका आ गया इस दिन उसके भाई का छेका करने फिर से उसके घर आना पड़ा। सारी तय्यारी करने के बाद शाम मे मुंगेर से चाफा के लिए जाना था काम जब लोग व्यस्त हो जाते है तो समय का पता नहीं चलता शाम हो गई जब घर से सब निकल रहे थे तो अचानक से फुआ याद दिलाई बहन की ननद हो गी कुछ लिया उसके लिए तब अचानक से उसका चेहरा सामने आ गया पर शाम हो गई थी फिर जल्दी से बजार जा कर कुछ समझ नहीं आया तो एक डब्बा चौकलेट का पैक करा कर ले गया दिल तो कर रहा था अपनी जज्बात लिख कर उस चौकलेट के डब्बा मे डाल दु पर अपनी प्रतिस्ठा और उस के बारे मे कुछ जानकारी ना होने की वजह से रुक गया बजार मे लेट होने की वजह से सभी लोग आगे निकल गये जब तक मे घर आया फिर गाड़ी निकाल कर गया। घर मे खुशी का माहोल सभी व्यस्त ये अगे वाले रुम मे बैठक की व्यवस्था थी पर मे कभी रुम तो कभी बाहर निकल कर देख रहा था कभी तो उनसें नजर मिले पर वो मिली नहीं नास्ता होने के बाद सभी छत पर गये पंडितजी अपनी तय्यारी मे वयस्त थे जब मे छत पे जा रहा था तब  उन से नजर मिली लाल रंग का गाउन उस पर सफेद आंचल उसे देख कर ऐसा लगा माने वक्त थम सा गया हो मुझे इतनी बला की खुबसूरत लग रही थी याद है वो चोकलेट का डब्बा वो देना था पर देने मे झिझक लग रहा था पर लडकी की छोटे भाई साथ मे था तो हिम्मत कर उसे वो डब्बा दे दिया।फिर इधर पंडित जी का अपना कार्यक्रम शुरू हो गया था सभी छत पर आगये थे रौशनी की व्यवस्था कम थी इस बात का दुख हो रहा था क्योंकि जब उस की तस्वीर लेने की कोशिश करता तो रौशनी कम होने की वजह सही नहीं आती वो छत पर एक लडकी के साथ हंसी मजाक कर रही थी पर वो इस बात से अंजान थी कोई उस को देख कर एक अलग ही अपनी दुनिया बना रहा है जहां सोच की सीमा अंतहीन सागरों मे गोते लगाती है वहीं मेरे साथ हो रहा था और कब सब रस्म पुरा हो गया मुझे पता ही नहीं चला फिर सभी निचे आगये कुछ देर बाद खाना खाने सभी उपर गए तो पता चला मांसाहारी की व्यस्था है और मे शाकाहारी मे तो निचे रह गया तब मेरे साथ 3 लोगो का खाने की वयस्था निचे ही की गई। कितनी बार ऐसा होता है जब आप के लिए अलग से व्यस्था की जाती है तो मन मे बहुत से प्सन आ जाते है लेकिन कहते है जो होता है अच्छे के लिए होता. है इसी बहाने उस की अवाज पहली बार मेरे कान मे सुनाई पड़ी और उस के हाथ से थाली मे खाना मिला। सभी काम खत्म होने के बाद अब सब वापस आने के लिए तय्यार थे फिर वो अपने बीच वाले कमरे मे लड़की के छोटे भाई को ले के गई और हंसी मजाक कर रही थी और साथ मे एक और लड़की थी उस समय तक मुझे नहीं पता था कौन है पर वो भी बला की खुबसूरत लग रही थी। जब आप अच्छा पल बिताते है तो वो समय कितनी जल्दी खत्म हो जाता है पता नहीं चलता है और जब समय कठीन होता है  तो एक पल साल के समान प्रतित होता है।चलिए फिर मिलते है....। तीसरी मुलाकात

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